
जहाँ तक नज़र जाये हर जगहे पानी
फिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
फिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
मिनिस्टर के घोटालों में नोटों की धार का पानी
मजदूर की मेहनत में लाल रंग का पानी
मजबूर की आँखों के कोरो में पानी
फिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
मजदूर की मेहनत में लाल रंग का पानी
मजबूर की आँखों के कोरो में पानी
फिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
विष्णु के चरणों में पानी ब्रह्मा के कमंडल में पानी
शिव की जटाओं में पानी
शिव की जटाओं में पानी
फिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
हिमालये की गोद में पानी भागीरथ की भक्ति में पानी
हर की पोरी में मैला कुचला गंगा का पानीफिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
किसान के बुझे चहरे पर पानी
आसाम बिहार में जगह जगह पानी
गागर में सागर जैसा पानी
फिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
कागजी नहरों में बहता पानी
नगर पालिका के नल में पानी
बरसातों में घर घर में दिखता पानी
फिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
भारतीय नारी की लज्जा हो गई पानी
भारतीय संस्कृति हो गई पानी
ये सब देख मैं भी शर्म से हो गया पानी पानी और पानी
फिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
हिमालये की गोद में पानी भागीरथ की भक्ति में पानी
हर की पोरी में मैला कुचला गंगा का पानीफिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
किसान के बुझे चहरे पर पानी
आसाम बिहार में जगह जगह पानी
गागर में सागर जैसा पानी
फिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
कागजी नहरों में बहता पानी
नगर पालिका के नल में पानी
बरसातों में घर घर में दिखता पानी
फिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
भारतीय नारी की लज्जा हो गई पानी
भारतीय संस्कृति हो गई पानी
ये सब देख मैं भी शर्म से हो गया पानी पानी और पानी
फिर भी इंसान कहता है पीने को नहीं दो बूंद पानी
बहुत खूब अनुज जी...
जवाब देंहटाएंatti uttam
जवाब देंहटाएंक्या बात है..
जवाब देंहटाएंBin paani sab soon!
जवाब देंहटाएंPaane ka bahane haalaton par bahut achhi chot kee hai aapne!