शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

इश्क

न मैं दीवाना न पगला
न मैं आशिक न मैं अफसाना
मैं तो हूँ सबसे अलग
उसे दिल से नहीं
अपनी रूह अपने जिस्म
अपने हर साँस
से चाहने वाला
वो रूह जो कभी मरती नहीं
वो जिस्म जो जल कर भी मिटता नहीं
वो साँस जो अमर है इस ब्रह्माण्ड में
अरे दिल्लगी करने वालो
तुम क्या जानो प्यार क्या होता है
ये मुझ से सीखो प्यार कैसे होता hai

1 टिप्पणी: